Wednesday, 1 April 2020

आईआईटी बीएचयू ने बताया घर में हैंडवॉश बनाने का फार्मूला - नीम, तुलसी और रीठा के साथ एलोवेरा बनाएं हैंडवॉश


नीम व तुलसी के गुणों वाले हैंडवॉश से संक्रमण दूर होगा। कोविड-19 के फैलाव को रोकने लिए अल्कोहल युक्त सेनेटाइजर बनाने के कच्चे माल की कमी को देखते हुए आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने हैंडवॉश बनाने का घरेलू फार्मूला बताया है। इससे आसानी से घर पर ही हैंडवॉश बनाया जा सकता है। इसमें नीम, तुलसी और रीठा के साथ एलोवेरा की जरूरत होगी। 
नीम व तुलसी के एंटीबैक्टीरियल गुणों से सभी परिचित हैं। औषधीय गुणों से युक्त नीम व तुलसी वर्षों से लोगों के घरों में प्रमुखता से इस्तेमाल की जाती है। केमिकल इंजीनयरिंग विभाग के प्रो. पीके मिश्रा ने बताया कि सेनेटाइजर बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले केमिकल की कमी हो गई है। पर इससे घबराने की बात नहीं है। हैंडवॉश घर में ही तैयार किया जा सकता है। यह न सिर्फ कारगर व सस्ता होगा, बल्कि इसे बहुत ही आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए 100 ग्राम नीम की पत्ती, इतनी ही तुलसी और 50 ग्राम रीठा को दो लीटर पानी में उबालना है। जब पानी एक लीटर से थोड़ा ज्यादा बचे तब आंच से उतार कर ठंडा कर लें फिर इसके बाद एलोवेरा का गूदा उसमें मिला कर बोतल में रख लें। इसका इस्तेमाल साबुन की तरह किया जा सकता है। घोल को हाथ में लें और थोड़ा पानी लेकर कम से कम 20 सेकेंड तक हाथों को अच्छी तरह से रगडें और अंत में पानी से धो लें। प्रो. पीके मिश्र ने बताया कि ऐसे ही फिटकरी, नीम, रीठा और एलोवेरा को भी मिलाकर हैंडवॉश तैयार किया जा सकता है। 
कोई भी क्षारीय पदार्थ वायरस से रक्षा करेगा। अतः अपने शरीर का पीएच भी  क्षारीय रखें। इसके लिए साइट्रिक फल जैसे संतरा, नीबू, मकोय का सेवन कर सकते हैं। जैसे साबुन वायरस के लिपिड को तोड़कर उसे नष्ट करता है, वैसे ही नमक पानी भी लिपिड को नष्ट कर सकता है अतः यदि साबुन से सब्जी धोने का मन न करे तो उसे नमक के घोल में 10-15 मिनट तक भिगों कर रख दें, फिर पानी से खूब धो लें। 
इन्हें आजमाएं 
1. जेब में रखें फिटकरी
सेनेटाइजर न मिल रहा हो और साबुन लेकर चलने में दिक्कत है तो जेब में फिटकरी रख कर चलें। संक्रमण से बचाने में फिटकरी का एक टुकड़ा भी काम आएगा। थोड़ा सा पानी लेकर हाथ पर फिटकरी को रगड़ कर भी संक्रमण को दूर किया जा सकता है।
2. नमक के घोल में धोएं सब्जी
बाहर से सब्जी व फल खरीदकर लाएं तो उसे कुछ देर के लिए नमक के पानी में रखें। साबुन के पानी से सब्जी व फल धोने से उसमें साबुन की महक समा जाएगी। पर नमक के घोल से ऐसी दिक्कत नहीं होगी। इसे साफ पानी से धोने के बाद इसे इस्तेमाल करें।
3. घर में जलाए कपूर, लोहबान
घर के वातावरण को शुद्ध रखने के लिए धूप, कपूर अथवा लोहबान जलाएं इससे घर का वातावरण स्वच्छ रहेगा। मच्छर व मक्खी कम होंगे, जिससे संक्रमण की संभावना भी दूर होगी। 
4. सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव
संक्रमण से बचने के लिए घर में तथा बाहर सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव कराए 10 ग्राम हाइपोक्लोराइड में एक लीटर पानी डालें। और छिड़काव करें। घर के बाहर ब्लीचिंग पाउडर भी घोल कर छिड़क सकते है।  
5. ऐसे बनाएं सेनेटाइजर
फिटकरी और कपूर की बराबर की मात्रा को पाउडर बना लें। थोडे़ से पानी में तुलसी की पत्ती डालकर उबाल ले इस घोल में पाडर मिक्स कर सेनेटाइजर के रूप में प्रयोग करे। ऐसे ही फिटकरी एलावेरा और गुलाब जल को भी मिला सकते है।


Thursday, 12 March 2020

केवल नाक बहने या छींक से घबराएं नहीं,इन लक्षणों से जानें सर्दी-बुखार है या कोरोनावायरस



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना को विश्वव्यापी महामारी घोषित कर दिया है। वहीं देश में कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है, जिसमें 17 विदेशी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि भारत में अबतक इससे किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अबतक इसका इलाज भी नहीं ढूंढा जा सका है। इस बीच भय के माहौल में लोग सामान्य बुखार या सर्दी में भी घबरा जा रहे हैं। अधिकतर लोगों को कोरोनावायरस की खास जानकारी नहीं है। दरअसल कोरोना, सर्दी-बुखार या सीजनल फ्लू से बिल्कुल अलग है। आइए, जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
सबसे पहले जानते हैं मौसमी बुखार के बारे में:
इसकी शुरुआत आकस्मिक हो सकती है। मौसम में बदलाव के बीच लापरवाही बरतने के कारण लोग बीमार हो जाते हैं। 
·         लक्षण: बुखार, सूखी खांसी, मांसपेशियों में दर्द, थकान, सिरदर्द, गले में दर्द, नाक से पानी बहना
·         अन्य लक्षण: दस्त, उल्टी
·         एक से चार दिन तक संक्रमण के लक्षण दिखते हैं। 
·         जटिल मामले: एक फीसदी केस (निमोनिया वाले)
·         इसका सामान्य उपचार उपलब्ध है और अधिकतम एक से दो सप्ताह के अंदर आप ठीक हो जाते हैं।
अब जानते हैं सामान्य सर्दी के बारे में:
ठंड लगने के कारण सर्दी होना आम बात है। आंख, नाक और कान के माध्यम से ठंडी हवा लगने से या फिर ठंडे वातावरण में ठंडी चीजें ज्यादा खाने से हमें सर्दी हो जाती है। 
·         लक्षण: बहती नाक, छींक, गले में दर्द
·         अन्य लक्षण: सामान्य बुखार, शरीर या मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और थकान
·         दो से तीन दिन तक संक्रमण के लक्षण दिखते हैं।
·         सर्दी में जटिल मामले बेहद कम, नहीं के बराबर होते हैं। 
·         सामान्य दवाओं या घरेलू उपचार से अधिकतम एक सप्ताह के भीतर आप ठीक हो जाते हैं।
अब जानते हैं कोरोनावायरस के बारे में: 
कोरोनावायरस एक संक्रामक रोग है, जिससे अबतक दुनियाभर में 3100 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी है। इसकी शुरुआत अचानक हो सकती है। 
·         लक्षण: बुखार, सूखी खांसी, मांसपेशियों में दर्द, थकान
·         अन्य लक्षण: सिरदर्द, खून वाली खांसी और दस्त
·         संक्रमण के लक्षण सामान्यत: 1-14 दिन तक, जबकि कुछ मामलों में 24 दिन भी दिखते हैं।
·         कोरोना से पीड़ित मामलों में 5 फीसदी जटिल मामले हो सकते हैं। 
·         इनमें निमोनिया, सांस लेने में परेशानी, मल्टीपल आर्गन फेल्योर जैसे मामले सामने आते हैं। 
·         इस बीमारी की अबतक कोई वैक्सीन या एंटीबायोटिक उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों का उपचार संभव है। 
·         अबतक सामने आए मामलों में उचित इलाज के जरिए दो से छह सप्ताह के अंदर लोग ठीक हो  जा रहे हैं। 
·         अब समझते हैं कि सीजनल फ्लू से कोरोना कितना अलग है: 
सीजनल फ्लू
कोरोनावायरस
पीड़ित व्यक्तियों में औसतन 0.1 फीसदी की जान जाती है
केवल वुहान में इससे संक्रमित 2 प्रतिशत की मौत
हर मरीज औसतन 1.3 लोगों में संक्रमण फैलाता है
एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 2.2 लोगों को संक्रमित करता है
65 से अधिक उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा
प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर खतरा ज्यादा
कोरोना की फिलहाल कोई दवा नहीं है, हालांकि कई परीक्षण चल रहे हैं। फ्लू की चार दवाइयां पहले से हैं। लक्षण सामने आने पर तुरंत डॉक्टर से मिलने और दवा लेने से राहत मिल सकती है। इन सारी जानकारियों के बाद आप भी समझ गए होंगे कि अगर आपका नाक जाम है या उससे पानी गिर रहा है तो आप कोरोनावायरस से पीड़ित नहीं हैं। 
कई लोगों के मन में ये सवाल भी रहता है कि क्या उन्हें कोरोना की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि जांच कराना उन्हें जरूरी है, जो पिछले कोरोनावायरस से प्रभावित देशों की यात्रा से लौटे हों या फिर प्रयोगशाला में पॉजिटिव पाए गए मरीजों से सीधे संपर्क में आए हों। ऐसे लोगों को सलाह दी जाती है कि 14 दिनों के लिए घर में आइसोलेशन में रहें। 

14 दिनों के भीतर लक्षण दिखने लगें तो प्रयोगशाला में जांच कराएं। स्वास्थ्य मंत्रालय की हेल्पलाइन +91 11 23978046 पर संपर्क करें। किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आएं तो फिर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। 
बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखना है जरूरी
·         बार-बार आंख, नाक मुंह छूने से बचें।
·         संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रखें।
·         सर्दी, जुकाम, बुखार और कफ होने पर अस्पताल जरूर जाएं।
·         साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धुलें।
·         भीड़भाड़ में 3 से 6 फुट की दूरी बना कर चलें।
·         बार-बार हाथ धोते रहें ताकि कीटाणु न फैलें।
साभार 

Wednesday, 12 February 2020

माइग्रेन के दर्द ने कर दिया है बेहाल तो रोजाना करें ये 4 योगासन, चंद दिनों में महसूस करेंगे फर्क


अगर आए दिन आप माइग्रेन के दर्द से परेशान रहते हैं और दवा लेने के बावजूद आपको राहत महसूस नहीं हो रही है तो ये 4 योगासन आपकी मदद कर सकते हैं। माइग्रेन भी एक तरह का सिरदर्द है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति को रह-रहकर सिरदर्द के बहुत तेज अटैक पड़ते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ये आम सिर दर्द की तरह पूरे सिर में नहीं होता माइग्रेन का दर्द व्यक्ति के आधे सिर में होता है और यह दर्द आता-जाता रहता है। व्यक्ति को यह दर्द 4 से 72 घंटे तक रह सकता है। माइग्रेन को लेकर किए गए एक शोध में पता चला है कि लगभग चार में से एक महिलाएं और 12 में से एक पुरुष माइग्रेन की समस्या से जूझते हैं।  आखिर कैसे आप इन 4 योगासन की मदद से माइग्रेन से जुड़ी दिक्कतों से आसानी से निजात पा सकती हैं। 
माइग्रेन के लक्षण-
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माइग्रेन होने पर जी मचलने लगता है, शरीर असहज महसूस करने लगता है।
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सिर में भारी पन होने लगता है ।
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सिर के पीछे की भाग जो गर्दन से सटा होता है उसमे दर्द महसूस करना।
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तेज रोशनी से आंख में जोर पड़ना ।
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ज्यादा आवाज या शोर होने पर चिड़चिड़ापन महसूस करना।
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हर वक्त तनाव में रहना। 
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माइग्रेन से होने वाला दर्द ज्‍यादातर शाम को होता है।
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माइग्रेन के कारण आंखों में भी तकलीफ रहती है।


1-प्राणायाम-
प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आरामदायक मुद्रा में बैठें।  अब गहरी श्वास लेते और छोड़ते जाएं। नाक से सांस लेते समय छाती और फिर अपना पेट फुला लें जबकि सांस छोड़ते समय अपने पेट और फिर अपनी छाती को अनुबंधित करें। इस योग अभ्यास को 10 बार दोहराएं। सांस लेते और छोड़ते समय अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित रखें। 
2-अनुलोम विलोम प्राणायाम-
1. सबसे पहले आरामदायक मुद्रा में बैठें।
2.
इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए।
3.
अब अनामिका अंगुली से बाई नासिका को बंद कर दें। 
4.
इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें।
5.
अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड दें।
नोट- दूसरी बार में आप जिस नासिका से सांस छोड़ रहे हैं उसी से दोबारा सांस को अंदर लेकर दूसरी नासिका से छोड़ना है। 
3-भ्रामरी प्राणायाम या हमिंग बी ब्रीदिंग-
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एक समतल पर शांत, प्राणायाम की मुद्रा में बैठ जाएं। आंखों को बंद कर लें।
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दोनों हाथों की अनामिका उंगली से अपने कान बंद कर लें।
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एक लंबी गहरी सांस लें। इसके बाद बिना मुंह खोले भ्रमर की आवाज़ निकालें। धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।
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इसी प्रक्रिया को 6-7 बार दोहराएं। इसके बाद अंगूठे की मदद से कान बंद करें और चारों उंगलियों को चेहरे पर रखें।
4- योग निद्रा- 
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सबसे पहले ढीले कपड़े पहनकर कंबल पर शवासन की स्थिति में लेट जाएं। जमीन पर दोनों पैर लगभग एक फुट की दूरी पर हों। हथेली कमर से छह इंच दूरी पर हो और आंखे बंद रखें।
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इसके बाद सिर से पांव तक पूरे शरीर को पूर्णत: शिथिल कर दीजिए और मन-मस्तिष्क से तनाव हटाकर निश्चिंतता से लेटे रहें। इस दौरान पूरी सांस लेना व छोड़ना जारी रखें।
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अब कल्पना करें कि आप के हाथ, पांव, पेट, गर्दन, आंखें सब शिथिल हो गए हैं। तब फिर स्वयं से मन ही मन कहें कि मैं योग निद्रा का अभ्यास करने जा रहा हूं। ऐसा तीन बार दोहराएं और गहरी सांस छोड़ना तथा लेना जारी रखें।
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अब अपने मन को शरीर के विभिन्न अंगों पर ले जाइए और उन्हें शिथिल व तनाव रहित होने का निर्देश दें। पूरे शरीर को शांतिमय स्थिति में रखें। महसूस करें की संपूर्ण शरीर से दर्द बाहर निकल रहा है और मैं आनंदित महसूस कर रहा हूं। गहरी सांस ले।
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फिर अपने मन को दाहिने पैर के अंगूठे पर ले जाइए। पांव की सभी अंगुलियां कम से कम पांव का तलवा, एड़ी, पिंडली, घुटना, जांघ, नितंब, कमर, कंधा शिथिल होता जा रहा है।
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इसी तरह बायां पैर भी शिथिल करें। सहज सांस लें व छोड़ें। अब लेटे-लेटे पांच बार पूरी सांस लें व छोड़ें। इसमें पेट व छाती चलेगी। पेट ऊपर-नीचे होगा।
साभार 

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